महाकालेश्वरउज्जैन, मध्य प्रदेश
द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र में: उज्जयिन्यां महाकालम्
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कहाँ है
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश के उज्जैन नगर में, शिप्रा नदी के किनारे है। उज्जैन का पुराना नाम अवंतिका है, और यह सात मोक्षपुरियों में से एक है। उज्जैन के लोग मानते हैं कि उनके नगर के असली राजा भगवान महाकाल ही हैं।
बारह ज्योतिर्लिंगों में महाकाल अकेले ऐसे हैं जिनका मुख दक्षिण की ओर है, इसलिए उन्हें दक्षिणमुखी कहते हैं। दक्षिण दिशा को काल की दिशा माना जाता है, और महाकाल यानी काल के भी काल, समय के स्वामी। इसीलिए कहते हैं कि महाकाल के भक्त को काल का डर नहीं रहता।
कथा: दूषण का अंत
शिव पुराण में कथा है कि अवंतिका में वेदप्रिय नाम के एक ब्राह्मण रहते थे, जो रोज़ मिट्टी का शिवलिंग बनाकर उसकी पूजा करते थे। उनके चार पुत्र भी उन्हीं की तरह शिव जी के बड़े भक्त थे। पूरा नगर पूजा-पाठ और भक्ति से भरा रहता था।
उन्हीं दिनों दूषण नाम का एक राक्षस था, जिसे ब्रह्मा जी से वरदान मिला था। वरदान के घमंड में वह धर्म के कामों को नष्ट करने लगा। वह अपनी सेना लेकर अवंतिका पर चढ़ आया और ब्राह्मणों से बोला, "पूजा-पाठ बंद करो, नहीं तो सबको मार डालूँगा।"
नगर के लोग डर गए, पर वेदप्रिय के पुत्रों ने कहा, "डरो मत। भगवान शिव हमारी रक्षा करेंगे।" वे शांत बैठकर शिव जी का ध्यान करते रहे। जैसे ही दूषण उन पर हमला करने आगे बढ़ा, उसी शिवलिंग के पास की धरती ज़ोर से फटी, और उसमें से भगवान शिव भयंकर रूप में प्रकट हुए।
भगवान ने एक हुंकार भरी, और उसी हुंकार से दूषण वहीं भस्म हो गया। उसकी सेना भाग खड़ी हुई। भक्तों ने हाथ जोड़कर विनती की, "प्रभु, आप सदा यहीं रहकर हमारी रक्षा कीजिए।" भगवान शिव मान गए और महाकाल नाम से ज्योतिर्लिंग रूप में वहीं विराजमान हो गए।
भस्म आरती और उज्जैन
महाकाल की भस्म आरती संसार भर में प्रसिद्ध है। यह रोज़ भोर से पहले, अँधेरे में होती है। ढोल-नगाड़ों और मंत्रों के बीच भगवान का भस्म से श्रृंगार होता है। यह आरती देखने के लिए भक्त पहले से बुकिंग करके रात से ही पंक्ति में लग जाते हैं।
उज्जैन बहुत पुराना नगर है। यहाँ हर बारह वर्ष में सिंहस्थ कुंभ मेला लगता है। पुराने भारतीय ज्योतिष में समय की गणना उज्जैन से ही होती थी। महाकवि कालिदास और राजा विक्रमादित्य का नाम भी इसी नगर से जुड़ा है। पास में हरसिद्धि माता का मंदिर और काल भैरव मंदिर भी हैं।
दर्शन और यात्रा
उज्जैन साल भर जाया जा सकता है, पर अक्टूबर से मार्च तक मौसम सबसे अच्छा रहता है। सावन के सोमवारों पर महाकाल की सवारी निकलती है, और महाशिवरात्रि पर बहुत बड़ा उत्सव होता है। भस्म आरती की बुकिंग और दर्शन के समय मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट पर देखें।
उज्जैन का अपना बड़ा रेलवे स्टेशन है। सबसे पास का हवाई अड्डा इंदौर है, जहाँ से सड़क से थोड़ी ही दूरी है। ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग भी इंदौर के पास है, इसलिए दोनों एक साथ देखे जाते हैं।
इस ज्योतिर्लिंग से हम सीखते हैं कि डर के आगे भी भक्ति नहीं छोड़नी चाहिए। वेदप्रिय के पुत्र शांत बैठे रहे, और भगवान स्वयं धरती फाड़कर आ गए। जय महाकाल!