भीमाशंकरपुणे, महाराष्ट्र
द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र में: डाकिन्यां भीमशङ्करम्
3 मिनट
कहाँ है
भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र में पुणे से कुछ दूर, सह्याद्रि की पहाड़ियों में है। मंदिर घने जंगलों के बीच बसा है, और यहीं से भीमा नदी निकलती है, जो आगे चलकर कृष्णा नदी में मिल जाती है। बरसात में यहाँ की पहाड़ियाँ बादलों से ढक जाती हैं, और चारों ओर झरने बहने लगते हैं।
मंदिर के आसपास का जंगल भीमाशंकर वन्यजीव अभयारण्य है। यहाँ शेकरू नाम की बड़ी, रंगबिरंगी गिलहरी मिलती है, जो महाराष्ट्र का राज्य पशु है। मंदिर पत्थर का बना है, पुरानी नागर शैली में, और उसकी दीवारों पर सुंदर नक्काशी है।
कथा: कुंभकर्ण का पुत्र भीम
शिव पुराण में कथा है कि रावण के भाई कुंभकर्ण का एक पुत्र था, जिसका नाम भीम था। वह अपनी माता कर्कटी के साथ सह्याद्रि के जंगलों में रहता था। जब वह बड़ा हुआ, तो उसे पता चला कि उसके पिता कुंभकर्ण को भगवान राम ने, जो विष्णु के अवतार थे, युद्ध में मारा था।
भीम के मन में बदले की आग जल उठी। उसने ब्रह्मा जी की कठोर तपस्या की और उनसे बहुत बल पा लिया। उस बल के घमंड में उसने देवताओं को हरा दिया और धरती पर धर्म के कामों को रोकने लगा। वह जहाँ जाता, वहाँ पूजा-पाठ बंद करवा देता।
उन दिनों कामरूप देश के राजा सुदक्षिण भगवान शिव के बड़े भक्त थे। भीम ने उन पर हमला किया, उनका राज्य छीन लिया और उन्हें कारागार में डाल दिया। पर राजा सुदक्षिण ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने कारागार में ही मिट्टी का शिवलिंग बनाया और रोज़ उसकी पूजा करते रहे।
जब भीम को यह पता चला, तो वह क्रोध से भर गया। वह तलवार लेकर कारागार में आया और बोला, "तुम किसकी पूजा कर रहे हो? मैं इस शिवलिंग को ही तोड़ दूँगा।" जैसे ही उसने तलवार उठाई, शिवलिंग से भगवान शिव स्वयं प्रकट हुए और भीम का अंत कर दिया।
देवताओं और ऋषियों ने भगवान शिव से विनती की, "प्रभु, आप यहीं रहकर संसार की रक्षा कीजिए।" भगवान शिव मान गए और वहीं ज्योतिर्लिंग रूप में विराजमान हो गए। भीम का अंत करने के कारण वे भीमाशंकर कहलाए।
जंगल और मंदिर
भीमाशंकर का मंदिर पहाड़ी के ढलान पर नीचे की ओर बना है, इसलिए सीढ़ियाँ उतरकर मंदिर तक पहुँचते हैं। आसपास गुप्त भीमाशंकर, भीमा नदी का उद्गम कुंड, और नागफणी नाम की एक ऊँची चट्टान है, जहाँ से कोंकण तक का दृश्य दिखता है। प्रकृति और भक्ति दोनों यहाँ एक साथ मिलते हैं।
दर्शन और यात्रा
भीमाशंकर साल भर जाया जा सकता है। बरसात में, जुलाई से सितंबर तक, यहाँ का जंगल सबसे सुंदर होता है, पर पहाड़ी रास्ते फिसलन भरे हो जाते हैं, इसलिए सावधानी से जाएँ। अक्टूबर से फ़रवरी तक मौसम सुहावना रहता है। महाशिवरात्रि पर यहाँ बड़ा मेला लगता है। दर्शन के समय मंदिर की वेबसाइट पर देख लें।
सबसे पास का बड़ा शहर, हवाई अड्डा और रेलवे स्टेशन पुणे है, जहाँ से पहाड़ी सड़क भीमाशंकर तक जाती है। त्र्यंबकेश्वर और घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग भी महाराष्ट्र में ही हैं, इसलिए तीनों की यात्रा एक साथ की जा सकती है।
इस ज्योतिर्लिंग से हम सीखते हैं कि बदले की आग अंत में अपने आप को ही जलाती है, और सच्चा भक्त कारागार में भी अपनी भक्ति नहीं छोड़ता। हर हर महादेव!