
लक्ष्मी जी और गणेश जी साथ क्यों पूजे जाते हैं
3 मिनट · लक्ष्मी जी की कहानियाँ
दिवाली की रात हर घर में लक्ष्मी पूजन होता है। पर अगर आप ध्यान से देखें, तो माता लक्ष्मी के साथ हमेशा गणेश जी की मूर्ति भी रखी जाती है। बच्चे अक्सर पूछते हैं, "लक्ष्मी जी तो भगवान विष्णु की पत्नी हैं, तो उनके साथ विष्णु जी की जगह गणेश जी क्यों?" इसके पीछे एक बहुत प्यारी लोक कथा है।
एक बार वैकुंठ में माता लक्ष्मी भगवान विष्णु से बातें कर रही थीं। बातों-बातों में उन्होंने कहा, "स्वामी, सारा संसार मेरी पूजा करता है। मेरी कृपा से ही लोगों को धन, सुख और वैभव मिलता है। मैं सबको सब कुछ दे सकती हूँ।" उनकी बात में थोड़ा गर्व झलक रहा था।
भगवान विष्णु मुस्कुराए। वे लक्ष्मी जी का यह गर्व दूर करना चाहते थे। उन्होंने प्यार से कहा, "देवी, आप सबको सब कुछ देती हैं, यह सच है। पर शास्त्र कहते हैं कि जब तक किसी स्त्री को मातृत्व का सुख न मिले, तब तक वह स्वयं को पूर्ण नहीं मानती।" यह सुनकर लक्ष्मी जी उदास हो गईं, क्योंकि उनकी कोई संतान नहीं थी।
दुखी मन से लक्ष्मी जी कैलाश पर्वत पर अपनी सखी माता पार्वती के पास गईं। उन्होंने अपनी सारी व्यथा कही और बोलीं, "बहन, आपके दो पुत्र हैं, कार्तिकेय और गणेश। क्या आप अपना एक पुत्र मुझे गोद दे सकती हैं?"

माता पार्वती मुस्कुराईं, पर थोड़ी चिंता में भी पड़ गईं। वे जानती थीं कि लक्ष्मी जी एक जगह टिककर नहीं रहतीं, आज यहाँ तो कल वहाँ। उन्होंने कहा, "बहन, आप तो चंचला हैं। मेरे पुत्र का ध्यान कैसे रखेंगी?" लक्ष्मी जी ने वचन दिया, "बहन, मैं आपके पुत्र को अपनी आँखों के तारे की तरह रखूँगी। मैं जहाँ भी जाऊँगी, उसे साथ रखूँगी।"
माता पार्वती ने गणेश जी को लक्ष्मी जी को सौंप दिया। लक्ष्मी जी ने नन्हे गणेश को गोद में उठाया और उनका मन ख़ुशी से भर गया। उन्होंने प्रसन्न होकर कहा, "आज से गणेश मेरे दत्तक पुत्र हैं। मेरी सारी सिद्धियाँ, सुख और समृद्धि मैं इन्हें देती हूँ। और यह वचन देती हूँ कि जो कोई मेरी पूजा करेगा, उसे पहले गणेश की पूजा करनी होगी। जो गणेश के बिना मेरी पूजा करेगा, उसके घर मैं नहीं ठहरूँगी।"

इसीलिए दिवाली की रात लक्ष्मी जी के साथ गणेश जी की पूजा होती है, और पूजा में पहले गणेश जी को याद किया जाता है। परंपरा में गणेश जी को लक्ष्मी जी के बाईं ओर बिठाया जाता है, जैसे कोई माँ अपने बच्चे को अपने पास बिठाती है। गणेश जी बुद्धि के देवता हैं, और लक्ष्मी जी धन की। बड़े-बुज़ुर्ग कहते हैं कि बुद्धि के बिना धन टिकता नहीं, इसलिए दोनों साथ पूजे जाते हैं।
दिवाली पर लोग "शुभ" और "लाभ" भी लिखते हैं, जिन्हें गणेश जी के पुत्र माना जाता है। दरवाज़े पर लिखा "शुभ लाभ" याद दिलाता है कि कमाई हमेशा शुभ, यानी सच्चे और अच्छे रास्ते से होनी चाहिए।
इस कहानी से हम सीखते हैं कि घमंड छोड़कर ही सच्चा सुख मिलता है, और धन के साथ बुद्धि का होना बहुत ज़रूरी है। समझदारी से कमाया और समझदारी से ख़र्च किया धन ही घर में टिकता है। शुभ दीपावली! जय गणेश! जय माँ लक्ष्मी!