
अयोध्या वापसी और दीपावली
4 मिनट · राम जी की कहानियाँ
लंका में धर्म की जीत हुई। रावण का अंत हुआ, और श्री राम ने लंका का राज्य धर्मात्मा विभीषण को सौंप दिया। अब चौदह बरस का वनवास पूरा होने वाला था। राम का मन अयोध्या, अपनी माताओं और सबसे बढ़कर भाई भरत को देखने के लिए व्याकुल था, क्योंकि भरत ने कहा था कि अगर राम समय पर नहीं लौटे, तो वे अपने प्राण त्याग देंगे।
विभीषण ने राम को पुष्पक विमान भेंट किया। यह एक अद्भुत उड़ने वाला महल जैसा रथ था, जो मन की गति से उड़ता था। राम, सीता, लक्ष्मण, हनुमान, सुग्रीव, विभीषण और वानर सेना के प्रमुख उसमें बैठे, और विमान आकाश में उड़ चला। रास्ते में राम सीता जी को वे सारी जगहें दिखाते गए: लंका का रणक्षेत्र, समुद्र पर बना सेतु, किष्किंधा, पंपा सरोवर और पंचवटी।
राम ने हनुमान जी को पहले भेजा। उन्होंने कहा, "हनुमान, जल्दी जाकर भरत को मेरे आने की ख़बर दो, और देखो कि उनका मन कैसा है।" हनुमान जी उड़कर नंदीग्राम पहुँचे। वहाँ भरत वल्कल पहने, जटा बाँधे, दुबले-पतले होकर राम की खड़ाऊँ के सामने बैठे थे। हनुमान जी ने कहा, "भरत जी, जिनके लिए आप दिन-रात तप कर रहे हैं, वे श्री राम आ रहे हैं!" भरत ख़ुशी से रो पड़े।
सारी अयोध्या में यह ख़बर आग की तरह फैल गई। लोग दौड़-दौड़कर नगर सजाने लगे। रास्तों पर फूल बिछाए गए, घरों पर झंडे लगे, और दरवाज़ों पर तोरण। जब पुष्पक विमान नंदीग्राम में उतरा, तो भरत नंगे पैर दौड़े, सिर पर राम की खड़ाऊँ लिए।

राम ने विमान से उतरते ही भरत को उठाकर गले लगा लिया। दोनों भाई देर तक एक-दूसरे से लिपटे रहे, और दोनों की आँखों से आँसू बहते रहे। फिर भरत ने राम के पैरों में वही खड़ाऊँ पहनाईं और कहा, "भैया, आपकी यह धरोहर मैंने चौदह बरस सँभाली। आज आपका राज्य आपको लौटाता हूँ।" राम ने माताओं के चरण छुए, और माताओं ने अपने बेटों को सीने से लगा लिया।
कार्तिक महीने की अमावस्या की रात थी, सबसे अँधेरी रात। पर उस रात अयोध्या में अँधेरा कहीं नहीं था। हर घर, हर छत, हर गली और सरयू के हर घाट पर लोगों ने मिट्टी के दीये जलाए। सारी नगरी जगमगा उठी, मानो आकाश के तारे धरती पर उतर आए हों। लोग नाचे, गाए, और मिठाइयाँ बाँटीं। तभी से हर बरस इस दिन दीपावली मनाई जाती है।
इसके बाद गुरु वशिष्ठ ने शुभ दिन देखकर श्री राम का राज्याभिषेक किया। राम राजसिंहासन पर बैठे, उनके साथ सीता जी। लक्ष्मण ने राजछत्र थामा, भरत और शत्रुघ्न ने चँवर डुलाए, और हनुमान जी राम के चरणों में बैठ गए। सारे देवताओं ने आकाश से फूल बरसाए।

राम ने बरसों तक अयोध्या पर राज किया। उनके राज्य में कोई दुखी नहीं था, कोई भूखा नहीं था, कोई झूठ नहीं बोलता था, और सब अपने धर्म का पालन करते थे। समय पर वर्षा होती, खेत लहलहाते, और बड़ों के सामने बच्चों पर कोई संकट नहीं आता। इसीलिए आज भी जब हम सबसे अच्छे राज्य की बात करते हैं, तो उसे "राम राज्य" कहते हैं।
इस कहानी से हम सीखते हैं कि अँधेरा चाहे कितना भी गहरा हो, सत्य और धर्म का दीया जलता रहे तो अंत में उजाला ही होता है। दीपावली हमें याद दिलाती है कि प्रेम, धैर्य और अच्छाई की हमेशा जीत होती है। बोलो सियावर रामचंद्र की जय! शुभ दीपावली!