॥ तेरा मंगल, मेरा मंगल, सबका मंगल होय रे ॥
तेरा मंगल, तेरा मंगल, तेरा मंगल होय रे
सबका मंगल, सबका मंगल, सबका मंगल होय रे
जिस गुरुदेव ने धरम दिया है, उनका मंगल होय रे
जिस जननी ने जनम दिया है, उसका मंगल होय रे
पाला-पोसा और बढ़ाया, उस पिता का मंगल होय रे
इस जगत के सब दुखियारे प्राणी का मंगल होय रे
जल में, थल में और गगन में, सबका मंगल होय रे
अन्तरमन के गाँठें टूटे, अन्तर निर्मल होय रे
राग, द्वेष और मोह मिट जाये, शील समाधि होय रे
शुद्ध धर्म धरती पर जागे, पाप पराजित होय रे
इस धरती के तर तिन में, कण-कण में धर्म समोय रे
शुद्ध धर्म जन-जन में जागे, घर-घर शांति समोय रे
तेरा मंगल, मेरा मंगल, सबका मंगल होय रे
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