Sadhna
रोज मेरी खिड़की से झांकता है वो
भजन · कृष्ण

॥ रोज मेरी खिड़की से झांकता है वो ॥

रोज मेरी खिड़की से झांकता है वो

ताजा-ताजा माखन मांगता है वो

ना दूं तो मिट्टी उछालता है वो

ताजा-ताजा माखन मांगता है वो

बोलता है थोड़ा सा तुतला के मांगता है माखन वो शरमा के चोरी चोरी आंगन को लांघता है वो

ताजा-ताजा माखन मांगता है वो

नरम कलाई पकड़ती हूं माखन हथेली पर रखती हूं धीरे-धीरे माखन को चाटता है वो

ताजा-ताजा माखन मांगता है वो

जब जब मैं माखन बिलोती हूं आंसुओं से दामन भिगोती हूं मेरा गिरधारी सब कुछ जानता है वो

ताजा-ताजा माखन मांगता है वो

रोज मेरी खिड़की से झांकता है वो

ताजा ताजा माखन मांगता है वो

ना दूं तो मिट्टी उछालता है वो

ताजा-ताजा माखन मांगता है वो

Source
Bhajan Potli, https://www.bhajanpotli.com/lyrics-1/%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%9C-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%96%E0%A4%BF%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%9D%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A5%88-%E0%A4%B5%E0%A5%8B
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