॥ पूजा की थाली सजा रखी है, माँ तेरी ज्योत जला रखी है ॥

पूजा की थाली सजा रखी है

माँ तेरी ज्योत जला रखी है

मन मंदिर में बसा रखी है

माँ तेरी ज्योत जला रखी है

है माँ ज़ुबाँ पर जब भी तेरा नाम आता है

तब ये दिल मेरा बहक जाता है

और तुझे पाने के लिए कुछ भी कर जाऊँगा

एक बार दर्श दिखा दे वरना रो रो के मर जाऊँगा

सजाया जगराता भवानी आ जाओ

शरण में बैठे हैं दरश दिखला जाओ

तुम्हारे दर्शन को मेरा मन रोता है

दिखा दो सूरत माँ हमें न तरसाओ

आज न आई जो जगदम्बा, होगी तू बदनाम

होगी तू बदनाम

राह में पलकें बिछा रखी है

माँ तेरी ज्योत जला रखी है

तेरे दर से दाती मैं मशहूर हो गया

इतना रोया कि ग़म सारा दूर हो गया

और मुझे काँच समझ कर दुनिया ने फेंक दिया

तेरे चरणों में आकर मैं कोहिनूर हो गया

दीवाना तेरा हूँ, तेरे दर आया हूँ

बड़ी मुश्किल से माँ पता मैं पाया हूँ

रहूँगा चरणों में, कहीं न जाऊँगा

ज़माने की ठोकर बड़ी मैं खाया हूँ

बिगड़ी बना दे ओ जगदम्बा, मैंने लिया तेरा नाम

मैंने लिया तेरा नाम

नज़रें क्यों हमसे हटा रखी है

माँ तेरी ज्योत जला रखी है

तेरी चौखट पर आना मेरा काम है

मेरी बिगड़ी बनाना तेरा काम है

छोड़ दी कश्ती मैंने तेरे नाम पर

अब इसे किनारा लगाना तेरा काम है

सुना है चरणों में तेरी जो आता है

ज़माने की ख़ुशियाँ यहीं से पाता है

मुरादें मन की तू सभी को देती है

तेरी चौखट से वो न खाली जाता है

लाज रखे भगतों की भवानी, बिगड़े बनाए काम

बिगड़े बनाए काम

हमने भी अर्जी लगा रखी है

माँ तेरी ज्योत जला रखी है

कश्ती मेरी मझधार में जब भी गोते खाती है

तब मेरी माँ दौड़ी आती है

मुझे फ़र्क नहीं पड़ता ये दुनिया क्या कहती है

मैं अपनी माँ का बेटा हूँ, बस ये बात मुझे भा जाती है

तुम्हारा बेटा हूँ, मुझे न ठुकराना

मुसीबत आई है, यहीं पर तुम आना

छुपा लो आँचल में, बना दो बिगड़ी माँ

तुम्हारा प्रेमी हूँ, ये झोली भर दो माँ

सबसे आला सबसे निराला, मय्या तेरा धाम

मय्या तेरा धाम

भजनों की गंगा बहा रखी है

माँ तेरी ज्योत जला रखी है