Sadhna
ॐ जय अम्बे गौरी
आरती · दुर्गा · common, 13 पद

॥ ॐ जय अम्बे गौरी ॥

ॐ जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।

तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥

मांग सिन्दूर विराजत, टीको मृगमद को।

उज्ज्वल से दोउ नैना, चन्द्रवदन नीको॥

कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।

रक्तपुष्प गल माला, कण्ठन पर साजै॥

केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी।

सुर नर मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी॥

कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती।

कोटिक चन्द्र दिवाकर, राजत सम ज्योति॥

शुम्भ निशुम्भ बिदारे, महिषासुर घाती।

धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती॥

चण्ड मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे।

मधु कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥

ब्रह्माणी रुद्राणी, तुम कमला रानी।

आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी॥

चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरूं।

बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरू॥

तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता।

भक्तन की दुख हरता, सुख सम्पत्ति करता॥

भुजा चार अति शोभित, खड्ग खप्पर धारी।

मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी॥

कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।

श्री मालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति॥

श्री अम्बेजी की आरती, जो कोई नर गावे।

कहत शिवानन्द स्वामी, सुख सम्पत्ति पावे॥